शादी के 10 साल बाद बनी दरोगा: रूबी कुमारी ने गांव लौटकर बेटियों को दिए सफलता के मंत्र

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समस्तीपुर/रोसड़ा बिहार: शादी के 10 साल बाद और दो बच्चों की परवरिश के साथ बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनने वाली रूबी कुमारी जब छुट्टी में अपने गांव लौटीं तो सीधे पहुंचीं बीएसएस क्लब। वहां उन्होंने बिहार पुलिस की तैयारी कर रही छात्राओं से मुलाकात की, उनका उत्साहवर्धन किया और सफलता के टिप्स दिए।

रूबी कुमारी: परिवार की ज़िम्मेदारी के साथ सपना पूरा करने वाली मिसाल

रूबी ने साबित किया कि शादी और बच्चों की ज़िम्मेदारी के बावजूद महिलाएं अपने सपनों को साकार कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा, “गांव की बेटियां मेहनती होती हैं, अगर लगन से पढ़ाई करेंगी तो सरकारी नौकरी भी कदम चूमेगी।”

उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी और कहा कि आधी आबादी का आर्थिक रूप से सशक्त होना बेहद ज़रूरी है।

बीएसएस क्लब: बिना शिक्षक के बन रहा अफसरों का गढ़

बीएसएस क्लब एक ऐसा अध्ययन केंद्र है जहाँ कोई औपचारिक शिक्षक नहीं होता।

यहां से चयनित होने वाले छात्र छुट्टियों में गांव लौटकर अपने जूनियर को गाइड करते हैं। रूबी कुमारी भी इसी क्लब से पढ़कर दरोगा बनीं और अब अपने अनुभव साझा कर रही हैं।

शादी के 10 साल बाद दो बच्चों

बीएसएस क्लब से चयनित कुछ सफल नाम

नाम

पद

रूबी कुमारी

बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर

सुमन कुमार

बिहार पुलिस कांस्टेबल

राजीव रंजन

राजस्व विभाग क्लर्क

नेहा शर्मा

बिहार सचिवालय सहायक

रवि कुमार

फॉरेस्ट गार्ड

पूजा कुमारी

सरकारी स्कूल शिक्षिका

अनिल यादव

सहायक जेल अधीक्षक

कोमल कुमारी

उत्पाद सब-इंस्पेक्टर

सोनू राज

होमगार्ड

प्रीति वर्मा

बिहार पुलिस कांस्टेबल

सरकारी नौकरी के बाद पौधरोपण की परंपरा

बीएसएस क्लब में एक अनोखी परंपरा है — जब कोई छात्र सरकारी नौकरी में चयनित होता है तो वह पौधा लगाकर समाज को संदेश देता है। यह सिर्फ एक प्रतीक नहीं, जिम्मेदारी का अहसास भी है।

रूबी की यात्रा बनी प्रेरणा

  • शादी के 10 साल बाद सफलता पाना आसान नहीं होता
  • दो बच्चों की ज़िम्मेदारी के साथ पढ़ाई करना एक चुनौती थी
  • लेकिन हौसले और मेहनत ने राह आसान कर दी

रूबी ने छात्राओं को बताया, “अगर मैंने कर लिया तो आप क्यों नहीं? बस फोकस रखिए, समय का सदुपयोग करिए और कभी हार मत मानिए।”

रूबी कुमारी की सफलता यात्रा

वर्ष

उपलब्धि

2013

विवाह

2014

पहले बच्चे का जन्म

2017

दूसरे बच्चे का जन्म

2018

बीएसएस क्लब से पढ़ाई की शुरुआत

2023

दरोगा परीक्षा में सफलता

2025

गांव लौटकर बेटियों को प्रेरित किया

बीएसएस क्लब की खास बातें

  • बिना शिक्षक के पढ़ाई की व्यवस्था
  • सीनियर-जूनियर का मार्गदर्शन मॉडल
  • पूरी तरह निशुल्क
  • प्रतियोगी परीक्षाओं पर केंद्रित माहौल
  • पौधरोपण जैसी सामाजिक ज़िम्मेदारी

निष्कर्ष

रूबी कुमारी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला उदाहरण है। उन्होंने दिखा दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना साकार किया जा सकता है।

उनकी वापसी से बीएसएस क्लब में पढ़ रही बेटियों को नई ऊर्जा मिली है और यह संदेश गया है कि अगर चाह हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

रूबी कुमारी कौन हैं?

रूबी कुमारी बिहार पुलिस की सब-इंस्पेक्टर हैं, जिन्होंने शादी के 10 साल बाद और दो बच्चों की परवरिश के साथ यह परीक्षा पास की।

बीएसएस क्लब क्या है?

यह एक गांव-आधारित सामूहिक अध्ययन केंद्र है जहाँ छात्र-छात्राएं एक-दूसरे की मदद से सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं।

क्या बीएसएस क्लब में कोई शिक्षक होता है?

नहीं, यहां सीनियर छात्र ही शिक्षक की भूमिका निभाते हैं और चयनित होने के बाद छुट्टियों में लौटकर जूनियर को गाइड करते हैं।

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